ज्ञान मुद्रा कैसे करे, लाभ, नुकसान, सावधानियां | Gyan Mudra In Hindi

नमस्कार, इस आर्टिकल में हम ज्ञान मुद्रा क्या है ? ज्ञान मुद्रा कैसे करते है ? ज्ञान मुद्रा के क्या फायदे है ? और ज्ञान मुद्रा करते वक्त क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए इन सभी के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

देखिये मैं जानता हूँ कि आपका समय बहुत ही कीमती है और इसलिए इस लेख के शुरुवात में ही मैं आपसे ये बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि अगर आप इस लेख को पढ़ रहे हैं तो कृपया पढने के बाद इसमें दी गयी बातों पर अमल जरुर करियेगा। मैं नहीं चाहता कि व्हात्सप्प पर आए सुविचारों की तरह आप इस लेख को भी पढ़कर किसी अलमारी में बंद करके रख दें। 

इन्सान के दिमाग और शरीर का बहुत प्यारा, पवित्र और गहरा रिश्ता होता, जैसे पति और पत्नी का। इनका रिश्ता एक दूसरे पर इतना निर्भर होता है कि जब भी इन में से किसी एक की तबियत खराब होती है तो दूसरे की हालत भी खराब होनी शुरू हो जाती है। तो आज इस लेख में हम आपके साथ दिमाग, ज्ञान और बुद्धिमत्ता के बारे में बात करेंगे।

मेरी नानी मुझसे कहा करती है कि “मन चंगा ते जग चंगा” जिसका अर्थ है कि अगर इन्सान इन्सान का मन और दिमाग चंगा हो यानी शांत हो तो व्यक्ति हो हर चीज़ अच्छी लगने लगती है, उसे ऐसा लगता है मानो कि उसके मुर्दे शरीर में किसी ने जान फूक दी हो। और वही दूसरी तरफ अगर उसका मन अशांत हो तो उसे कोई चीज़ नहीं भाति। उसे हर चीज़ में नक्रात्म्कता नज़र आने लगती है। उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन दिखने लगता है और ना जाने मन में कितने बुरे विचार आने शुरू हो जाते हैं। 

मुझे नहीं लगता कि आपको ये बात बताने की जरूरत है कि कब कब आपका मन शांत होता है और कब अशांत। मुझसे ज्यादा बेहतर आप इस चीज़ को जानते हैं कि आप जब भी परेशान होते हैं तो आपका मन आपके दिमाग पर हावी हो जाता है जिसकी वजय से आप अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। आप अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिनके दिमाग में ऐसे विचार आते हैं, दुनिया में हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे विचार कभी ना कभी किसी उम्र में आ ही जाते हैं। लेकिन आखिर में सिर्फ वही इन्सान इन बुरे विचारो और परेशानियों के चंगुल से निकल पाता है जो इनसे बाहर निकलने का कोई मार्ग ढूंढता है।  

तो इसलिए आज इस लेख में हम आपके लिए ऐसा ही एक मार्ग ढूंढकर लाए हैं जो हमारे भारत देश में प्राचीन काल से चलता आ रहा है। इस उपाय का नाम है “ज्ञान मुद्रा”। तो चलिए आपको डिटेल में बताते हैं कि ज्ञान मुद्रा क्या होती है, इसके क्या फायदे हैं, क्या नुकसान हैं और कब-कब कितनी देर के लिए आप इसका अभ्यास कर सकते हैं।

ज्ञान मुद्रा क्या है? – Gyan Mudra in Hindi

इस मुद्रा को अंग्रेजी भाषा में “मुद्रा ऑफ़ नॉलेज” भी कहा जाता है। इस मुद्रा का प्रयोग योगगुरु, ऋषिमुनि और संतजन एकांत वातावरण में अपना ध्यान परमात्मा पर केन्द्रित करने, मन को शांत एवम् बुद्धिमत्ता को बढ़ाने के लिए करते थे। पुरातन काल में गुरुकुल में खासकर जिन विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति कमजोर होती थी या जिन्हें ध्यान केन्द्रित करने में समस्या होती थी, उनको इस मुद्रा का अभ्यास निरंतर करवाया जाता था। अगर आपको विश्वास ना हो तो आप चाहें तो आचार्य चाणक्य की कई कलाकृतियों में देखकर पुष्टि कर सकते हैं।

ज्ञान मुद्रा एक ऐसी शारीरिक अवस्था है जिसमे अगर कोई व्यक्ति बैठकर निरंतर ॐ (औम) शब्द का उच्चारण करता है तो आवश्य ही उसकी स्मरण शक्ति में आश्चर्यजनक वृध्धि होती है। शुरू के पहले सप्ताह में ही व्यक्ति को परिणाम मिलने आरम्भ हो जाते हैं। उसे पता अंदरूनी शांति और सुख का एहसास होने लगता है और ऐसा लगता है मानो उसे किसी की कही कोई बात का असर होना बंद हो जाता है। यानी वो व्यक्ति जीवन में सुखों पर इतराता नहीं है और दुःख आने पर खुद ही संभलकर जीवन व्यतीत कर लेता है।

ज्ञान मुद्रा की विधि (अभ्यास कैसे और कब तक करें)

योग गुरुओं और ऋषि मुनियों के मतानुसार निम्नलिखित विधि का प्रयोग ज्ञान मुद्रा का अभ्यास करने के लिए किया जा सकता है किन्तु ध्यान रहे की इससे आपके शरीर को और अधिक कष्ट नहीं होना चाहिए व कसे हुए (या टाइट) नहीं होने चाहिए:

  1. सबसे पहले आप जमीन पर (या फर्श) पर कोई ठोस कपड़ा जैसे: चादर, दरी, चटाई या खेस आदि बिछाकर चोंकड़ी लगाकर बैठ जाइए। चोंकड़ी लगाने का मतलब ये है की आप वज्र आसन, पद्मासन या सुखासन आदि में अपनी टांगो को क्रोस-लेग्स करके बैठें व अगर मुमकिन हो तो अपनी रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें। अगर आपकी टांगों में दर्द शुरू हो या चोकड़ी लगाकर ना बैठ पाएं तो तो आप कुर्सी पर या किसी आरामदायक जगह पर बैठकर भी इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं लेकिन ध्यान रहे कि अधिक लाभ पाने हेतु इस मुद्रा को सुखासन या पद्मासन में ही करें।
  2. दूसरे चरण में अपने दोनों हाथों को खोलकर घुटनों पर रखें व हथेलियों को चित्र में दिखाए अनुसार ऊपर आकाश की और खुला रखें।
  3. अब तीसरे चरण में धीरे धीरे अपनी तर्जनी ऊँगली (अंगूठे के बिल्कुल साथ वाली ऊँगली) को मोड़कर अंगूठे (थंब) के आगे के भाग को स्पर्श करें।
    ज्ञान मुद्रा करने की विधि
  4. ध्यान रहे कि आपकी बाकि तीन उँगलियाँ सीधी व सामने रहें, गर्दन या धड बिल्कुल सीधी हो और अब आँखे बंद करके धीरे धीरे लम्बे सांस लेकर-निकालकर औम (ॐ) के उच्चारण के साथ आनंद की अनुभूति लेना आरम्भ करें।
  5. शुरू शुरू में हो सकता है कि आपको इस मुद्रा का अभ्यास करने में परेशानी हो या कमर में दर्द शुरू हो तो शुरुवात में आप इसे कुछ पलों के लिए ही करें व् धीरे-धीरे सहुल्तानुसार समय बढाते रहें।
  6. शुरुवाती दिनों में ज्ञान मुद्रा का अभ्यास सुबह सवेरे कम से कम 15 मिनट व् 2 दिनों बाद अधिकतम 45 मिनट प्रतिदिन कर सकते हैं। सामान्य तौर पर 30 मिनट का समय ज्ञान मुद्रा के लिए उचित माना गया है। सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए ज्ञान मुद्रा का अभ्यास न्यूनतम 1 महीने के लिए करें इसके अलावा शारीरिक स्तिथि के अनुसार आप इस अवधि का समय कम ज्यादा भी कर सकते हैं।
  7. सलाह यह दी जाती है कि आप ज्ञान मुद्रा का अभ्यास खाली पेट प्रातकाल उठकर करें अन्यथा खाना खाने के कम से कम 45 मिनट बाद आप इसका अभ्यास कहीं भी कर सकते हैं।

ज्ञान मुद्रा के लाभ – Benefits of Gyan Mudra

  1. ध्यान यानी मैडिटेशन में ध्यान को एक जगह केन्द्रित करने में बेहद मदद करता है।
  2. यह मुद्रा ना केवल एकाग्रता, बुद्धिमत्ता और स्मरणशक्ति बढाता है बल्कि ये इन्सान की बुद्धि को इतना बल प्रदान करता है कि इन्सान अपने बुरे विचारों पर काबू पा लेता है और टेंशनात्मक बातों का उसके दिमाग पर असर होना कंकर के सामान नामात्र हो जाता है।
  3. रोगप्रतिरक्षण तंत्र को सशक्तिकरण प्रदान करता है।
  4. आत्म ज्ञान की प्राप्ति होती है व् मन एकांतचित हो जाता है।
  5. ऐसे लोग जिनका अक्सर सिरदर्द रहता है या अनिद्रा के कारण रात में भरपूर नींद नहीं ले पाते उनके लिए ये मुद्रा वरदान से कम नहीं है। ये मुद्रा माइग्रेन आदि जैसी मानसिक बिमारियों को शीघ्र ठीक करने में भी अति लाभकारी है।
  6. शीघ्रपतन रोग को रोकने में लाभकारी है।
  7. बुरे विचार जैसे अश्लीलता से भरे सपनो का नींद में आना आदि से छुटकारा पाने में मदद करता है।
  8. इन्सान का मनोबल बढ़ाकर उसे सवस्थ एवम् परिवारिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है। 

ज्ञान मुद्रा में क्या सावधानियां अपनानी चाहिए?

ज्ञान मुद्रा के कार्यकाल में व्यक्ति को निम्नलिखित बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए अन्यथा उसका किया गया अभ्यास निष्फल यानी फेल हो सकता है:

  1. पोर्नोग्राफी, नंगापन या अश्लीलता जैसी कोई भी सामग्री ना देखें। ज्ञान मुद्रा व्यक्ति का ध्यान मालिक से जोड़ने में करता है और अगर व्यक्ति इस दोरान या बाद में अश्लीलता देखता है तो उसका लगा लगाया  ध्यान भंग हो जाता है और सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
  2. फ़ोन का कम से कम इस्तेमाल करें। टॉयलेट या बाथरुम में फ़ोन का इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें। इससे आपकी सेहत के लिए हानिकारक बेक्टेरिया आपके अन्दर जाकर रोगी बना देते हैं जोकि आपकी मानसिक स्थितियों को बिगाड़ देते हैं।
  3. रात को जल्दी सोने व् सुबह जल्दी उठने की आदत बनाएं। रात को 11 बजे से पहले आपको नींद आ जानी चाहिए।
  4. दिन में तीन समय भोजन कर सकते हैं लेकिन ध्यान रहे कि सुबह का नाश्ता राजाओं की तरह करें, दोपहर का उससे कम और रात को बिल्कुल कम भोजन का सेवन करें। सेवन करने के बाद संभव हो तो कम से कम 1 किलोमीटर सैर जरुर करके सोएं।
  5. धैर्य रखें व जल्दी परिणाम पाने के लिए शुरुवाती दिनों में ही ज्यादा देर ज्ञानमुद्रा का अभ्यास ना करें। धीरे धीरे समय बढाएं।
  6. खाने पीने की आदतों पर विशेष ध्यान रखें व् जितना हो सके सात्विक भोजन ग्रहण करें। एसिडिटी या यूरिक एसिड उत्पन्न करने वाले भोज्य पदार्थ जैसे मिर्च मसलों से भरपूर पकवान, बटुरे-छोले या पुड़ी-छोले का सेवन बिल्कुल भी ना करें। आखिर स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और अगर आपका शरीर ही स्वस्थ नहीं होगा तो आपका मन ध्यान लगाने में विघन आवश्य पैदा करेगा।

ज्ञान मुद्रा के बारे में वीडियो :

ज्ञान मुद्रा से होनेवाले नुकसान से बचाव के उपाय

मालिक का नाम और आत्म विश्वास ये दो चीजे ऐसी हैं जो दवाई की किसी पद्वति में उपलब्ध नहीं। ऐसा कोई टॉनिक नहीं बना है जिसके सेवन से आत्म विश्वास बनता हो। इसलिए हमारे अनुसार अगर आपकी कोई भी बीमारी ठीक नहीं हो रही और आपको लगता है कि आपने सब उपाय करके देख लिए तो अब आप एक मौका उस ऊपर वाले को भी दें। उसके नाम का सुबह शाम जाप करें व फिर देखिए कि वो चाहे तो क्या नहीं हो सकता। उसके लिए हमारे शरीर से बीमारियां निकालना इतना आसान है जैसे हमारे लिए मलाई में से बाल को निकालना। 

अंत में

तो इसी के साथ आज का लेख खत्म होता है। अपना कीमती समय निकालकर इस लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुतबहुत धन्यवाद और मुझे आशा है कि यह लेख आपके लिए अति लाभकारी सिद्ध होगा। ज्ञान मुद्रा के जैसे वायु मुद्रा भी हमारे स्वस्थय के लिए बेहद लाभदायक है। जय हिंद।

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