वायु मुद्रा कैसे करे, लाभ, नुकसान, सावधानियां – Vayu Mudra In Hindi

हमारे शरीर में प्राण वायु ऑक्सीजन का बड़ा महत्व है। हमारे शरीर में होने वाली कई सारी क्रियाएं ऑक्सीजन के बिना नहीं हो पाती। इस लिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुद्ध वायु हमारे शरीर में जाए यह बेहद ही आवश्यक है। आज हम वायु मुद्रा के बारे में बात करने वाले है, जो की हमारे शरीर में होने वाले वायु के भ्रमण से संबंधित है।

इस आर्टिकल में हम वायु मुद्रा क्या है ? वायु मुद्रा कैसे करते है ? वायु मुद्रा के क्या फायदे है ? और वायु मुद्रा करते वक्त क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए इन सभी के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

अच्छा तो ये बताइए कि…..क्या आपको कभी टैंशन हुई है? वैसे तो ये पूछने लायक प्रशन नहीं है क्योंकि आजकल हर व्यक्ति के जीवन में टैंशन है और खासकर इस कोरोना महामारी के कारण तो इंसान बहुत परेशान और हताश है।

जिस नाज़ुक घड़ी से हमारा देश आज गुज़र रहा है, ऐसे दौर में शायद ही आपको कोई व्यक्ति दिखे जिसके चेहरे पर चिंता ना दिखाई दे या भविष्य को लेकर उसके मन में डर ना दिखाई दे।

किसी को अपनी जायदाद की चिंता है, तो किसी को अपनी औलाद के भविष्य की। कई लोग पोपट लाल की तरह शादी ना होने की वजह से परेशान हैं तो कहीं शादीशुदा इंसान तलाक़ तक लेने को तैयार हैं। किसी घर में बहु अपने सास–ससुर से परेशान है तो वहीं दूसरी तरफ छोटे बच्चे अपनी पढ़ाई से तंग है।

आजादी के इतने सालों के बाद आज भी कई ऐसे लोग हैं जिन्हें पेट भर पोष्टिक आहार नहीं मिल पाता। आज भी इंसान भूख से तड़प कर मर रहा है और दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे हैं जिनके पास मालिक का दिया सब कुछ होने के बावजूद भी वो परेशानियों से घिरे हुए हैं।

धर्मों के अनुसार “चिंता चिता के समान है” जिसका अर्थ है कि ये एक ऐसी बीमारी है जोकि इंसान के जीते जी प्राण ले सकती है और उसका जीना दुश्वार कर सकती है। तो आज इस लेख में हम इसी चिंता से पैदा हुई एक बहुत ही साधारण सी बीमारी “पेट की गैंस” के बारे में बात करेंगे।

कहने–सुनने में ये बीमारी जितनी सरल प्रतीत हो रही है…. असलियत में इसके परिणाम उससे कई गुणा ज्यादा दर्दनाक हैं। पेटी की गैस इंसान को परेशान और हताश बना देती है और उसे इतना मजबूर कर देती है कि वह ना तो बोल पाता है ना ही अपने दर्द को बयां कर पाता है।

हमारा भारत देश ना केवल जड़ी–बूटियों और विज्ञान के मामले में आगे है बल्कि हमारे देश को गुरुदेश कहलाने के पीछे यहां पैदा हुए हुए ऋषि मुनियों के यौगिक ज्ञान का भी पूरा हाथ है।

हमारे वैद्य एवम् योग गुरुओं ने कई ऐसी युक्तियां बताई हैं जिससे इंसान अपनी चिंता व पेट में बनने वाली सामान्य गैस की समस्याओं (एसिडिटी) से चंद पलों में बिना किसी दवाई के छुटकारा पा सकता है।

जी हां, योग गुरुओं ने इस आसन को वायु मुद्रा का नाम दिया है। तो चलिए बताते हैं आपको इसके बारे में और भी दिलचस्प बातें।

वायु मुद्रा क्या है?

दो शब्दो से मिलकर बना ये शब्द शरीर की कई आंतरिक समस्याओं से छुटकारा दिलवा सकता है। वायु अर्थात हवा और मुद्रा का अर्थ होता है शारीरिक आसन यानी ऐसा यौगिक आसन जिसकी सहायता से इंसान के शरीर में अनियंत्रित तरीके से बढ़ी हुई वायु को वापिस नियंत्रण में लाया जा सकता है।

शरीर में बड़ी वायु का स्तर आयुर्वेद के अनुसार वात रोग को दर्शाता है और वायु मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर में हवा की सही मात्रा को कायम करता है और दूसरे रोगों जैसे सूजन, गठिया, गाउट आदि सहित कई बाहरी व आंतरिक दर्द से छुटकारा पाने में इंसान की बेहद मदद करता है। इसे अपान वायु मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है।

वायु मुद्रा करने की विधि

योग गुरुओं और ऋषि मुनियों के मतानुसार निम्नलिखित विधि का प्रयोग वायु मुद्रा का अभ्यास करने के लिए किया जा सकता है किंतु ध्यान रहे कि इससे आपके शरीर को और कष्ट नहीं होना चाहिए अर्थात शरीर आरामदायक स्थिति में होना चाहिए व कपड़े कसे हुए (या टाइट) नहीं होने चाहिए:

  1. सबसे पहले आप जमीन (या फर्श) पर कोई चादर, चटाई या कपड़े का टुकड़ा बिछाकर चोंकड़गी लगाकर बैठ जाइए। चोंकड़ी लगाने से मतलब ये है कि आप वज्र आसन, पदमासन, सुखासन आदि में अपनी टांगो को क्रॉस–लेग्स करके बैठे व अगर मुमकिन हो तो अपनी रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें। अगर आपकी टांगो में दर्द हो या आप क्रॉस लेग्स में ना बैठ सकें तो आप कुर्सी पर या किसी आरामदायक जगह पर बैठकर भी ऐसा कर सकते हैं व जरूरत पड़ने पर चिकत्सिक से प्रमार्श भी ले सकते हैं।
  2. दूसरे चरण में अपने दोनो हाथों को खोलकर घुटनों पर रखें व हथेलियों को चित्र में दिखाए अनुसार ऊपर आकाश की और खुला रखें।
  3. अब तीसरे चरण में धीरे धीरे अपनी तर्जनी अंगुली (अंगूठे के बिलकुल साथ वाली पहली अंगुली) को मोड़कर अंगूठे की जड़ पर टच कर दें व बाकी की तीन अंगुलियों को सीधा रखें।
  4. ध्यान रहे कि आपकी गर्दन या धड़ बिलकुल सीधी हो और अब आंखे बंद करके धीरे धीरे लंबे सांस लेकर आनंद महसूस करें।
  5. पांचवे चरण में आप अपने दोनो हाथो के अंगूठे से मोड़ी हुई तर्जनी उंगलियों को आरामपूर्वक दबाए व थोड़ी ही देर में कष्ट की घड़ी में उंगलियों को सीधा कर लें व अपनी आंखों को खोल लें। यही विधि थोड़ी देर में दोबारा दोहराएं।
  6. शुरू शुरू में हो सकता है कि आपको परेशानी हो या उंगली दर्द हो तो आप आरंभ में इसे कुछ पलों के लिए कर सके हैं व धीरे धीरे सहुलतानुसार समय बढ़ा सकते हैं।

वायु मुद्रा करने की अवधि

वायु मुद्रा के अभ्यास की अवधि शुरुवाती दिनों में प्रतिदिन 10 से 15 मिनट व थोड़े दिनों के अभ्यास के बाद अधिकतम 45 मिनट प्रतिदिन। ये तीन 15–15 मिनट की किश्तों में विभाजित करके भी की जा सकती है। अच्छे परिणाम के लिए न्यूनतम अवधि 2 महीने की है बाकी व्यक्तिगत सहुलतानुसार फैसला बदला भी जा सकता है।

सलाह यह दी जाती है कि आप वायु मुद्रा का अभ्यास खाली पेट सुबह जल्दी उठकर करें अन्यथा खाना खाने के कम से कम 45 मिनट बाद आप इसका अभ्यास कहीं भी कभी भी कर सकते हैं।

वायु मुद्रा में सावधानियां

  1. ध्यान रहे कि बीमारी ठीक होने के बाद वायु मुद्रा का अभ्यास निरंतर ना करें। ऐसा करने से शरीर में वायु की कमी हो सकती है जिससे कई नए विकार उत्पन्न हो सकते हैं।
  2. खाली पेट सुबह जल्दी उठकर अभ्यास किया जाना चाहिए।
  3. धीरे धीरे सांस अंदर लें व बाहर छोड़े और अपने शरीर को टाइट कपड़ो की कैद में मत रखें जिसमें आपका दम घुटता हो।
  4. धैर्य रखें व जल्दी परिणाम पाने के लिए ज्यादा देर वायु मुद्रा का अभ्यास ना करें।
  5. खाने पीने की आदतों पर खास ध्यान रखें व जितना हो सके सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। गैस या यूरिक एसिड उत्पन्न करने वाले भोज्य पदार्थ जैसे मिर्च मसालों से भरे पकवान, राजमा, दालें, मटर, गोभी, पनीर, सोया इत्यादि का सेवन करना छोड़ दें। दालों का उपयोग या भोजन ग्रहण करना हो तो सूर्य की रोशनी यानी दिन छिपने से पहले–पहले करना चाहिए।

वायु मुद्रा के फायदे

शरीर में बढ़ी हुई अनियंत्रित हवा की निकासी करता है वात विकार को नॉर्मल करने में मदद करता है।

यह वात विकार से जुड़ी सभी बीमारियों के इलाज में सहायक है।

इसके अलावा यह निम्नलिखित रोगों के इलाज में भी सहायता कर सकता है:

  • पैरालिसिस
  • स्ट्रेस
  • छाती में दर्द
  • घुटने, कमर और गर्दन दर्द
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में
  • आर्थराइटिस
  • एब्डॉमिनल गैस
  • गाउट आदि।

वायु मुद्रा के नुकसान

अगर सही समय पर इस मुद्रा को बंद ना किया जाए तो व्यक्ति सांस का रोगी बन सकता है। इसलिए ध्यानपूर्वक एवम् जरूरत पड़ने पर चिकत्सक से परमार्श अवश्य करें।

बचाव के उपाय : मालिक का नाम और आत्म विश्वास — ये दो चीजे ऐसी हैं जो दवाई की किसी पद्वति में उपलब्ध नहीं। ऐसा कोई टॉनिक नहीं बना जिसके सेवन से आत्म विश्वास बनता हो। इसलिए हमारे अनुसार अगर आपकी कोई भी बीमारी ठीक नहीं हो रही और आपको लगता है कि आपने सब उपाय करके देख लिए तो अब आप एक मौका उस ऊपर वाले को भी दें। उसके नाम का सुबह शाम जाप करें व फिर देखिए कि वो चाहे तो क्या नहीं हो सकता। उसके लिए हमारे शरीर से बीमारियां निकालना इतना आसान है जैसे हमारे लिए मलाई में से बाल को निकालना।

वायु मुद्रा के बारे में वीडियो:

अंत में

तो इसी के साथ आज का लेख खत्म होता है, अलविदा।

अपना कीमती समय निकालकर इस लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुत–बहुत धन्यवाद और मुझे आशा है कि यह लेख आपके लिए अति लाभकारी सिद्ध होगा। इस लेख से आपको वायुुमुद्रा के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हुई होगी। अगर आपके मन में कोई प्रश्न या सुझाव है तो Comment में लिखे।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.